महर्षि अगस्त्य :हिन्दू ऋषि , महान तेजस्वी , शिक्षक , आध्यात्मिक गुरु , लोक कल्याणकारी

महर्षि अगस्त्य वैदिक काल के एक महान , ज्ञाता और आध्यात्मिक गुरु थे |उन्होंने अपनी पत्नी के साथ ऋग्वेद का कुछ अंश भी लिखा था | उनके आध्यात्मिक विकास के कारण एक दिव्य ज्योति हमेशा उनके चारों और रहती थी | हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार उन्होंने विंध्यांचल पर्वत को पैरों से दबाकर बढ़ने से रोक दिया था और इसी कारण उन्हें अगस्त्य कहते हैं (अग + स्तंभ) | 

एक बार देवताओं की सहायता के लिए अगस्त्य नेअंजुल में समस्त सातों समुंदरों को पी लिया था ताकि देवता समुद्रों में छिपे राक्षसों का विनाश कर सकें |







हिंदू धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण के अनुसार महर्षि अगस्त्य को भगवान विष्णु ने स्वयं  तमिल भाषा का ज्ञान दिया था इसीलिए अगस्त्य को तमिल भाषा का जनक माना जाता है और उन्होंने ही आरंभिक तमिल व्याकरण लिखी थी |


 उन्होंने वैदिक कालीन विज्ञान और चिकित्सा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था | महर्षि अगस्त्य कावेरी नदी को ब्रह्मलोक से कमंडल में भरकर पृथ्वी लोक पर लाए थे |





हिंदू ग्रंथ रामायण के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्री राम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ महर्षि अगस्त्य के आश्रम में गए थे वहां पर ऋषि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम को विश्वकर्मा द्वारा विष्णु के लिए बनाया गया धनुष दिया था जो शत्रु के किसी भी अस्त्र या शस्त्र से नहीं टूट सकता था इसी धनुष से भगवान श्रीराम ने कई राक्षसों का वध किया था |  ऋषि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को दो दिव्य तुणीर भी दिए जो उन्हें इंद्र से प्राप्त हुए थे यह तूणीर अक्षय थे इनमें रखे चार  बाण कभी भी समाप्त नहीं होते थे यह चारों बाण शत्रु का नाश करके विलीन हो जाते थे और फिर से अपने तुणीर में प्रकट हो जाते थे |
 उन्होंने भगवान श्रीराम को एक दिव्य बाण भी प्रदान किया जिससे भगवान शिव ने त्रिपुरा नाम के राक्षस का वध किया था | साथ ही उन्होंने लक्ष्मण को एक दिव्य तलवार दी थी जिससे तीनो लोको पर विजय प्राप्त की जा सकती थी और इसी से लक्ष्मण ने शूर्पणखा (रावण की बहन) का नाक काटा था |
महर्षि अगस्त्य ने भगवान श्रीराम को सीता की खोज के दौरान भी   दैवीय शक्तियां दी थी  जो रावण पर विजय पाने में सहायक थी |

ऐसा कहा जाता है कि अगर उत्तरी भाग का समस्त आध्यात्मिक बल एक पलड़े में रख दिया जाए और दूसरे पलड़े में महर्षि अगस्त्य को तो दक्षिण का पलड़ा भारी होगा |
 महर्षि अगस्त्य समस्त दक्षिण भारत दक्षिण पूर्वी एशिया दक्षिण एशिया एशिया जैसे श्रीलंका इंडोनेशिया में बहुत ही प्रसिद्ध हैं महर्षि अगस्त्य अपने आध्यात्मिक तेज और संसार के कल्याण के लिए जाने जाते हैं |





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